Gayatri Chalisa Lyrics In Hindi

गायत्री चालीसा माता गायत्री को समर्पित एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है, जिसे सभी वैदिक मंत्रों की जननी माना जाता है। इस पोस्ट में हम आपको gayatri chalisa lyrics  hindi में उपलब्ध करा रहे हैं। यह एक लोकप्रिय चालीसा है जिसे दुनिया भर के लाखों भक्तों द्वारा गाया जाता है। जो कि माता गायत्री की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में बहुत ही सहायक सिद्ध होता है। इस पोस्ट में हम आपको गायत्री चालीसा लिरिक्स के साथ ही गायत्री चालीसा के बारे में विस्तार से जानकारी भी उपलब्ध करा रहे हैं।

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!! दोहा !!

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड !

शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड !!

जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम !

प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम !!

!! चालीसा !!

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी !

गायत्री नित कलिमल दहनी !!

अक्षर चौबिस परम पुनीता !

इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता !!

शाश्वत सतोगुणी सतरुपा !

सत्य सनातन सुधा अनूपा !!

हंसारुढ़ सितम्बर धारी !

स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी !!

पुस्तक पुष्प कमंडलु माला !

शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला !!

ध्यान धरत पुलकित हिय होई !

सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई !!

कामधेनु तुम सुर तरु छाया !

निराकार की अदभुत माया !!

तुम्हरी शरण गहै जो कोई !

तरै सकल संकट सों सोई !!

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली !

दिपै तुम्हारी ज्योति निराली !!

तुम्हरी महिमा पारन पावें !

जो शारद शत मुख गुण गावें !!

चार वेद की मातु पुनीता !

तुम ब्रहमाणी गौरी सीता !!

महामंत्र जितने जग माहीं !

कोऊ गायत्री सम नाहीं !!

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै !

आलस पाप अविघा नासै !!

सृष्टि बीज जग जननि भवानी !

काल रात्रि वरदा कल्यानी !!

ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते !

तुम सों पावें सुरता तेते !!

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे !

जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे !!

महिमा अपरम्पार तुम्हारी !

जै जै जै त्रिपदा भय हारी !!

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना !

तुम सम अधिक न जग में आना !!

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा !

तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा !!

जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई !

पारस परसि कुधातु सुहाई !!

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई !

माता तुम सब ठौर समाई !!

ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे !

सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे !!

सकलसृष्टि की प्राण विधाता !

पालक पोषक नाशक त्राता !!

मातेश्वरी दया व्रत धारी !

तुम सन तरे पतकी भारी !!

जापर कृपा तुम्हारी होई !

तापर कृपा करें सब कोई !!

मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें !

रोगी रोग रहित है जावें !!

दारिद मिटै कटै सब पीरा !

नाशै दुःख हरै भव भीरा !!

गृह कलेश चित चिंता भारी !

नासै गायत्री भय हारी !!

संतिति हीन सुसंतति पावें !

सुख संपत्ति युत मोद मनावें !!

भूत पिशाच सबै भय खावें !

यम के दूत निकट नहिं आवें !!

जो सधवा सुमिरें चित लाई !

अछत सुहाग सदा सुखदाई !!

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी !

विधवा रहें सत्य व्रत धारी !!

जयति जयति जगदम्ब भवानी !

तुम सम और दयालु न दानी !!

जो सदगुरु सों दीक्षा पावें !

सो साधन को सफल बनावें !!

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी !

लहैं मनोरथ गृही विरागी !!

अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता !

सब समर्थ गायत्री माता !!

ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी !

आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी !!

जो जो शरण तुम्हारी आवें !

सो सो मन वांछित फल पावें !!

बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ !

धन वैभव यश तेज उछाऊ !!

सकल बढ़ें उपजे सुख नाना !

जो यह पाठ करै धरि ध्याना !!

!! दोहा !!

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय !

तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय !!

Gayatri Chalisa Lyrics in English 

!! Doha !!

Heen Shreem, Kleem, Medha, Prabha, Jeevan Jyoti Prachand!

Shanti, Kranti, Jagriti, Pragati, Rachna Shakti Akhand!!

Jagat Janani, Mangal Karni, Gayatri Sukh Dhaam!

Pranavon Savitri, Swadha, Swaha Purna Kaam!!

!! Chalisa !!

Bhurbhuvah Swah, Om Yut Janani!

Gayatri Nit Kalimal Dahan!

Aksar Chaubis Param Puneeeta!

Inme Basen Shastra, Shruti, Geeta!

Shashwat Satoguni Satarupa!

Satya Sanatan Sudha Anoopaa!!

Hansarudh Sitambar Dhari!

Svarnakanti Shuchi Gagan Bihari!!

Pustak Pushp Kamandalu Mala!

Shubhra Varn Tanu Nayan Vishala!!

Dhyan Darat Pulakit Hiya Hoi!

Sukh Upajat, Dukh Durmati Khoi!!

Kamdhenu Tum Sur Taru Chhaya!

Nirakar Ki Adbhut Maya!!

Tumhari Sharan Gehai Jo Koi!

Tarai Sakal Sankat Son Soi!!

Saraswati Lakshmi Tum Kali!

Dipai Tumhari Jyoti Nirali!!

Tumhari Mahima Parana Paven!

Jo Sharad Shat Mukh Gun Gaven!!

Char Ved Ki Matu Puneeeta!

Tum Brahmani Gauri Sita!!

Mahamantra Jitne Jag Maahi!

Kou Gayatri Sam Nahin!!

Sumirat Hiya Mein Gyan Prakasai!

Aalas Paap Agha Nasai!!

Srishti Bij Jag Janani Bhavani!

Kal Ratri Varda Kalyani!!

Brahma Vishnu Rudra Sur Jete!

Tum Son Paven Surata Tete!!

Tum Bhaktaan Ki Bhakt Tumhare!

Jananihin Putra Pran Te Pyare!!

Mahima Aparampar Tumhari!

Jai Jai Jai Tripada Bhay Haari!!

Purit Sakal Gyan Vijnaana!

Tum Sam Adhik Na Jag Mein Aana!!

Tumahin Jaani Kachu Rahai Na Shesha!

Tumahin Pay Kachu Rahai Na Klesha!!

Janat Tumahin, Tumahin Hai Jaai!

Paras Parasi Kudhatu Suhaai!!

Tumhari Shakti Dipai Sab Thaai!

Mata Tum Sab Thaur Samaai!!

Grah Nakshatr Brahmand Ghane Re!

Sab Gativaan Tumhare Prere!!

Sakal Srishti Ki Praan Vidhaata!

Paalak Poshak Naashak Traata!!

Mateshwari Daya Vrat Dhaari!

Tum San Tare Patki Bhaari!!

Jaapar Kripa Tumhari Hoi!

Taapar Kripa Karen Sab Koi!!

Mand Buddhi Te Budhi Bal Paven!

Rogi Rog Rahit Hai Jaaven!!

Darid Mitai Katai Sab Peera!

Naashai Dukh Harai Bhav Bheera!!

Grih Kalesh Chit Chinta Bhaari!

Naasai Gayatri Bhay Haari!!

Santiti Heen Susantati Paven!

Sukh Sampatti Yut Mod Manaaven!!

Bhoot Pishaach Sabai Bhay Khaaven!

Yam Ke Doot Nikat Nahin Aaven!!

Jo Sadhava Sumire Chit Laai!

Achat Suhag Sada Sukhdaai!!

Ghar Var Sukh Prad Lahain Kumari!

Vidhva Rahen Satya Vrat Dhaari!!

Jai Jati Jagdamb Bhavani!

Tum Sam Aur Dayalu Na Daani!!

Jo Sadguru Son Diksha Paven!

So Sadhan Ko Safal Banaaven!!

Sumiran Karen Suruchi Badbhaagi!

Lahain Manorath Grihi Viraagi!!

Asht Siddhi Navnidhi Ki Daata!

Sab Samarth Gayatri Maata!!

Rishi, Muni, Yati, Tapasvi, Yogi!

Aart, Arthi, Chintit, Bhogi!!

Jo Jo Sharan Tumhari Aaven!

So So Man Vanchhit Phal Paven!!

Bal, Buddhi, Vigha, Sheel Swabhav!

Dhan Vaibhav Yash Tej Uchaau!!

Sakal Badhen Upje Sukh Nana!

Jo Yeh Path Kare Dhari Dhyaana!!

!! Doha !!

Yeh Chalisa Bhaktiyut, Path Kare Jo Koy!

Taapar Kripa Prasannata, Gayatri Ki Hoy!!

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Gayatri Chalisa Lyrics Video

गायत्री चालीसा चालीस छंदों की रचना है, जिनमें से प्रत्येक माता गायत्री की महिमा को परिलक्षित करता है। ऐसा माना जाता है कि भक्ति के साथ गायत्री चालीसा का जाप करने से मन और आत्मा शुद्ध होती है और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है।

गायत्री चालीसा की शुरुआत माता गायत्री के आह्वान से होती है, जो उन्हें ज्ञान और दिव्य शक्ति के अवतार के रूप में स्तुति करती है। 

गायत्री चालीसा में गायत्री मंत्र के जप के लाभों का भी वर्णन किया गया है, जो हिंदू धर्म के सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। कहा जाता है कि गायत्री मंत्र का जाप करने से मनुष्य का शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान होता है।

गायत्री चालीसा का आध्यात्मिक महत्व के अलावा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसा माना जाता है कि इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। तुलसीदास रामायण पर अपने काम के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, लेकिन उन्होंने कई अन्य भक्ति भजनों और कविताओं की भी रचना की है।

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कुल मिलाकर, गायत्री चालीसा एक सुंदर और प्रेरक प्रार्थना है जो माता गायत्री के दिव्य गुणों का गुणगान करती है और भक्तों को उन गुणों को स्वयं में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह हिंदू धर्म में आस्था और भक्ति की स्थायी शक्ति का एक वसीयतनामा है और आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

Origin and History of gayatri chalisa

गायत्री चालीसा माता गायत्री को समर्पित एक प्रार्थना है। “चालीसा” शब्द का अर्थ हिंदी में “चालीस” होता है, और गायत्री चालीसा माता की स्तुति में 40 छंद लिखे गए है। गायत्री चालीसा की उत्पत्ति और इतिहास का पता प्राचीन हिंदू शास्त्रों और पौराणिक कथाओं से लगाया जा सकता है।

गायत्री मंत्र, जो ऋग्वेद का एक हिस्सा है, को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भक्ति और ईमानदारी के साथ गायत्री मंत्र का पाठ करने से ज्ञान और आध्यात्मिक विकास की वृद्धि होती है। गायत्री चालीसा गायत्री मंत्र का विस्तार है, और यह माना जाता है कि चालीसा का पाठ करने से माता की कृपा प्राप्त होती है और आध्यात्मिक विकास और ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है।

गायत्री चालीसा अवधी भाषा में लिखी गई है। ऐसा माना जाता है कि इस भजन की रचना 15वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर दौरान हुई थी। 

गायत्री चालीसा 16वीं शताब्दी में लोकप्रिय हुई जब इसे “दुर्गा सप्तशती” पुस्तक में शामिल किया गया, जो माता दुर्गा को समर्पित भजनों और प्रार्थनाओं का संग्रह है। यह पुस्तक हिंदू समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय हो गई, और जल्द ही देश भर के भक्तों द्वारा गायत्री चालीसा का पाठ किया जाने लगा।

वर्षों से, गायत्री चालीसा का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है, और अब इसे दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा व्यापक रूप से पढ़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भक्ति और ईमानदारी के साथ चालीसा का पाठ करने से माता की कृपा प्राप्त होती है और आध्यात्मिक विकास और ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है।

गायत्री चालीसा की संरचना

गायत्री चालीसा की रचना का श्रेय 16वीं शताब्दी के संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास को दिया जाता है, जिन्हें उनके अन्य कार्यों जैसे रामचरितमानस के लिए भी जाना जाता है।

गायत्री चालीसा माता गायत्री के आह्वान के साथ शुरू होती है, जो किसी की आध्यात्मिक यात्रा में उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन मांगती है। पहला श्लोक माता गायत्री की दिव्य प्रकृति और वेदों, प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों के साथ उसके संबंध को स्थापित करता है।

बाद के छंदों में मां गायत्री की भौतिक विशेषताओं और गुणों का वर्णन किया गया है, जैसे कि उनकी उज्ज्वल सुंदरता, चार वेदों के प्रतीक उसकी चार भुजाएँ, और उसके भक्तों के प्रति उनकी दयालु प्रकृति। भजन मां गायत्री को ब्रह्मांड की माँ के रूप में भी वर्णित करता है, जो अपने भक्तों को ज्ञान प्रदान करती है।

गायत्री चालीसा के बोल भी गायत्री मंत्र के महत्व और इसके पाठ के लाभों पर जोर देते हैं। कहा जाता है कि मंत्र मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है और आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाता है। चालीसा में दिन के अलग-अलग समय जैसे सूर्योदय, सूर्यास्त और मध्यरात्रि में गायत्री मंत्र का जाप करने के लाभों का भी उल्लेख किया गया है।

गायत्री चालीसा के अंतिम छंद माता गायत्री से प्रार्थना है, जीवन की चुनौतियों और बाधाओं से उनका आशीर्वाद और सुरक्षा मांगते हैं। भजन भी मां गायत्री को उनकी दिव्य कृपा और दया के लिए उनका आभार व्यक्त करता है।

गायत्री चालीसा का पाठ करते समय भक्ति का महत्व

ऐसा माना जाता है कि भक्ति और ईमानदारी के साथ गायत्री चालीसा का पाठ करने से पाठक को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह के कई लाभ मिलते हैं।

भक्ति गायत्री चालीसा का पाठ करने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। भक्ति का अर्थ है परमात्मा के प्रति गहरा प्रेम और श्रद्धा रखना, और किसी भी पवित्र पाठ या भजन का पाठ शुरू करने से पहले एक भक्तिपूर्ण मानसिकता विकसित करना आवश्यक है। भक्ति पाठक को गायत्री मंत्र की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने और इसके आध्यात्मिक सार को आत्मसात करने में मदद करती है।

गायत्री चालीसा का पाठ करते समय भक्ति इतनी महत्वपूर्ण क्यों है, इसके कुछ कारण यहां दिए गए हैं:

  • आध्यात्मिक संबंध स्थापित करना: गायत्री चालीसा का भक्ति के साथ पाठ करने से माता गायत्री के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है। जब हम विनम्रता, प्रेम और भक्ति के साथ परमात्मा के पास जाते हैं, तो हम दिव्य ऊर्जा के प्रति ग्राही हो जाते हैं और इसकी परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव कर सकते हैं।
  • मन और हृदय को शुद्ध करना: भक्ति मन और हृदय को शुद्ध करने का एक शक्तिशाली साधन है। जब हम भक्ति के साथ गायत्री चालीसा का पाठ करते हैं, तो हम अपने अहंकार, भय और शंकाओं को दूर करते हैं और खुद को परमात्मा के सामने समर्पित कर देते हैं। यह हमारे विचारों और भावनाओं को शुद्ध करने में मदद करता है, जिससे हम दिव्य मार्गदर्शन और ज्ञान के प्रति अधिक ग्राही बनते हैं।
  • एकाग्रता बढ़ाना: भक्ति गायत्री चालीसा के पाठ के दौरान एकाग्रता और ध्यान बढ़ाने में मदद करती है। जब हम भक्तिपूर्ण मानसिकता के साथ सस्वर पाठ करते हैं, तो हम शब्दों, उनके अर्थ और उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले आध्यात्मिक स्पंदनों के प्रति अधिक सजग हो जाते हैं। यह गायत्री मंत्र की हमारी समझ और संवेदना को गहरा करता है, पाठ को अधिक सार्थक और शक्तिशाली बनाता है।
  • आशीर्वाद का आह्वान: भक्ति के साथ गायत्री चालीसा का पाठ करना माता गायत्री से आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली तरीका है। जब हम एक सच्चे और विनम्र हृदय के साथ सस्वर पाठ करते हैं, तो हम परमात्मा के आशीर्वाद को आकर्षित कर सकते हैं, जो हमारी आध्यात्मिक और भौतिक खोज में हमारी मदद कर सकता है।

Importance of gayatri chalisa in Hinduism:

गायत्री चालीसा हिंदू धर्म का एक अनिवार्य हिस्सा है और दुनिया भर में लाखों भक्तों द्वारा इसका पाठ किया जाता है। गायत्री चालीसा में चालीस छंद या चौपाई शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक में माता के गुणों का गुणगान करती है।

गायत्री मंत्र हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। जोकि ऐसा माना जाता है कि आदि माता गायत्री द्वारा ऋषि विश्वामित्र को दिया गया था। माता के आशीर्वाद का आह्वान करने के साधन के रूप में मंत्र का जाप किया जाता है और इसे आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान का स्रोत माना जाता है।

गायत्री चालीसा गायत्री मंत्र का एक विस्तृत रूप है, और यह माना जाता है कि इसका पाठ करने से व्यक्ति शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास प्राप्त कर सकता है। भजन मन को शुद्ध करने और आत्मा को शुद्ध करने की क्षमता के लिए भी जाना जाता है, जिससे यह दैनिक हिंदू पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा बन जाता है।

गायत्री चालीसा का पाठ करने का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि यह मन को शांत करने और तनाव को कम करने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है कि छंदों को दोहराने से यह मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दूर करने में मदद मिलती है। यह भी माना जाता है कि चालीसा में पर्यावरण को शुद्ध करने की शक्ति है, जिससे यह धार्मिक समारोहों और अनुष्ठानों के दौरान एक लोकप्रिय रूटीन अभ्यास बन गया है।

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गायत्री चालीसा में उपचार के गुण भी होते हैं, जिसका पाठ करने के बाद कई भक्त शारीरिक और मानसिक बीमारियों से राहत पाते हैं। 

इसके अलावा, गायत्री चालीसा का पाठ करना माता गायत्री की भक्ति से जुड़ा हुआ है, और यह माना जाता है कि वह अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं जो भक्ति और विश्वास के साथ चालीसा का पाठ करते हैं। इसलिए गायत्री चालीसा का पाठ करने की प्रथा हिंदू पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा है और इसे अक्सर दैनिक प्रार्थना और अनुष्ठानों में शामिल किया जाता है।

गायत्री चालीसा का जाप करने के लाभ

दोस्तों गायत्री मंत्र एक शक्तिशाली मंत्र है जिसका हजारों वर्षों से ऋषियों और साधकों द्वारा जाप किया जाता रहा है। माना जाता है कि गायत्री चालीसा का जाप करने से मन, शरीर और आत्मा को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। गायत्री चालीसा का जाप करने के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:

  • आंतरिक शांति को बढ़ावा देता है: गायत्री चालीसा का जाप मन को शांत करने और आत्म शांति को बढ़ावा देने में मदद करता है। जप द्वारा उत्पन्न कंपन का तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करता है। नियमित जाप मन और शरीर के भीतर शांति और सद्भाव की भावना पैदा करने में मदद करता है।
  • एकाग्रता और फोकस बढ़ाता है: गायत्री चालीसा एकाग्रता और फोकस में सुधार के लिए एक शक्तिशाली साधन है। यह विकर्षणों से दिमाग को साफ करने में मदद करता है और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाता है। 
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: गायत्री चालीसा का जाप करने से उत्पन्न होने वाले कंपन का शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं। नियमित जप समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद करता है।
  • वोकल कॉर्ड्स में सुधार: गायत्री चालीसा का जाप करने में एक ही शब्दांश और ध्वनि को बार-बार दोहराना पड़ता है। यह वोकल कॉर्ड्स को मजबूत करने और आवाज की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है। यह श्वास पर नियंत्रण करने में भी मदद करता है।

Gayatri Chalisa Padhne Ke Fayde:

माना जाता है कि गायत्री चालीसा का पाठ मन, शरीर और आत्मा के लिए कई लाभ प्रदान करता है। गायत्री चालीसा का पाठ करने के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:

  • मानसिक शांति और स्पष्टता: गायत्री चालीसा एक शक्तिशाली प्रार्थना है जो मन को शांत करने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद करती है। ऐसा कहा जाता है कि गायत्री चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से विचारों की स्पष्टता और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • एकाग्रता बढ़ाता है: गायत्री चालीसा का पाठ करने से एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने में सुधार होता है। ऐसा माना जाता है कि भजन के जप से उत्पन्न कंपन मस्तिष्क के कार्य को बेहतर बनाने और स्मृति प्रतिधारण को बढ़ाने में मदद करता है।
  • आध्यात्मिक विकास को बढ़ाता है गायत्री चालीसा: आध्यात्मिक विकास के लिए गायत्री चालीसा एक शक्तिशाली उपकरण है। ऐसा कहा जाता है कि भजन के नियमित पाठ से व्यक्ति को परमात्मा से जुड़ने और स्वयं और ब्रह्मांड की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
  • नकारात्मकता को दूर करता है: गायत्री चालीसा में मन और आसपास से नकारात्मक ऊर्जा और विचारों को दूर करने की शक्ति पाई जाती है। यह वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • शारीरिक कल्याण को बढ़ावा देता है: गायत्री चालीसा के जप से उत्पन्न होने वाले स्पंदनों का शरीर के ऊर्जा केंद्रों या चक्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है।
  • आत्मविश्वास बढ़ाता है: गायत्री चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसा माना जाता है कि भजन भय और चिंता को दूर करने में मदद करता है और आंतरिक शक्ति की भावना को बढ़ावा देता है।

गायत्री चालीसा का ऐतिहासिक महत्व:

गायत्री मंत्र शास्त्रों में सबसे पुराने और सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है, जो ऋग्वेद से जुड़ा है, जो हिंदू धर्म का सबसे पुराना और पवित्र ग्रंथ है। मंत्र चौबीस अक्षरों से मिलकर बना है और माना जाता है कि यह माता गायत्री के दिव्य स्वरूप का आह्वान करता है। 

गायत्री चालीसा, जो गायत्री मंत्र पर आधारित है, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई थी, जो उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख कवि और संत थे। तुलसीदास को उनकी महान कृति, रामचरितमानस के लिए जाना जाता है, जो अवधी भाषा में हिंदू महाकाव्य, रामायण का पुनर्कथन है।

गायत्री चालीसा 16वीं शताब्दी के दौरान लिखा गया था और जनता के बीच गायत्री मंत्र की लोकप्रियता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसा माना जाता है कि तुलसीदास जी ने गायत्री चालीसा की रचना आम लोगों के लिए गायत्री मंत्र के जाप को आसान बनाने के लिए की थी। 

Who can recite gayatri chalisa:

गायत्री चालीसा माता गायत्री को समर्पित चालीस छंदों से बना एक भजन या प्रार्थना है। यह चालीसा माता गायत्री के आशीर्वाद का आह्वान करने और किसी के आध्यात्मिक विकास और ज्ञान को बढ़ाने के लिए एक शक्तिशाली साधन माना जाता है।

हिंदू धर्म में गायत्री चालीसा का पाठ करना एक पवित्र कृत्य माना जाता है, और जो कोई भी इस प्रार्थना की शक्ति में विश्वास करता है, वह इसका पाठ कर सकता है। गायत्री चालीसा का पाठ कौन कर सकता है, इसके बारे में कोई विशेष प्रतिबंध या नियम नहीं हैं। यह पुरुषों, महिलाओं, बच्चों, सभी जातियों के लोगों और माता गायत्री की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने की इच्छा रखने वाले किसी भी आध्यात्मिक साधक द्वारा गाया जा सकता है।

यह भी माना जाता है कि नियमित रूप से गायत्री चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, किसी की एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने और शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। हालांकि, इसे सिर्फ एक दिखावटी रूप में नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय, इरादे और भक्ति के साथ सुनाने की सलाह दी जाती है।

गायत्री चालीसा का जाप कैसे सीखें

गायत्री चालीसा एक हिंदू प्रार्थना है जिसे माता गायत्री की पूजा करने के लिए गाया जाता है, जो पवित्र गायत्री मंत्र का अलग रूप माना जाता है। गायत्री चालीसा का जप करना सीखना अपने आप में एक आध्यात्मिक यात्रा होती है और इसके लिए समर्पण, धैर्य और सीखने की इच्छा की आवश्यकता होती है। गायत्री चालीसा का जाप करने के तरीके सीखने के लिए यहां कुछ चरण दिए गए हैं:

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gayatri chalisa lyrics in hindi
  • गायत्री चालीसा को जाने: इससे पहले कि आप जप शुरू करें, गायत्री चालीसा के शब्दों और अर्थ से खुद को परिचित करना महत्वपूर्ण है। पाठ को पढ़ने के लिए कुछ समय निकालें और प्रत्येक पद का अर्थ समझें।
  • एक शिक्षक या गुरु खोजें: एक अनुभवी शिक्षक या गुरु से सीखना हमेशा सबसे अच्छा होता है जो जप की प्रक्रिया के माध्यम से आपका मार्गदर्शन कर सकता है। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते हैं जो आपको सिखा सकता है, तो आप अपने क्षेत्र में या ऑनलाइन कक्षाओं की तलाश करिए।
  • मूल बातों से शुरू करें: जब आप पहली बार गायत्री चालीसा का जप करना सीखना शुरू करें, तो मूल बातों से शुरुआत करें। प्रत्येक शब्द के उच्चारण का अभ्यास करें। 
  • अपनी सांस और मुद्रा पर ध्यान दें: जप करते समय अपनी सांस और मुद्रा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी और अपने पैरों को जमीन पर मजबूती से रखकर एक आरामदायक स्थिति में बैठें। अपने मन को शांत करने और अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कुछ गहरी साँसें लें।
  • भक्ति और निष्ठा से जप करें: गायत्री चालीसा एक प्रार्थना है जिसे भक्ति और ईमानदारी के साथ जप किया जाता है। जब आप जप करें तो शब्दों के अर्थ से समझें और अपना ध्यान माता गायत्री पर केन्द्रित करें। शुद्ध मन से जप करने से आपको परमात्मा से जुड़ने में मदद मिलती है।
  • नियमित अभ्यास करें: गायत्री चालीसा का जप सीखने के लिए अभ्यास और समर्पण की आवश्यकता होती है। नियमित रूप से अभ्यास करने की प्रतिबद्धता बनाएं, भले ही वह हर दिन कुछ मिनटों के लिए ही क्यों न हो। समय और अभ्यास के साथ, आप प्रार्थना के प्रति अधिक आश्वस्त और सहज हो जाएंगे।

कोई गायत्री चालीसा को अपने दैनिक साधना में कैसे शामिल कर सकता है

गायत्री चालीसा को अपने दैनिक साधना में शामिल करने से ईश्वर के साथ संबंध को गहरा करने और शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक विकास पाने में मदद मिलती है।

गायत्री चालीसा को अपनी दैनिक साधना में शामिल करने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

  • गायत्री चालीसा का पाठ करने के लिए एक विशिष्ट समय निर्धारित करें: गायत्री चालीसा का पाठ करने के लिए आप प्रत्येक दिन एक विशिष्ट समय निर्धारित कर सकते हैं यह आपको एक दिनचर्या स्थापित करने और इसे अपनी साधना का एक नियमित हिस्सा बनाने में मदद करेगा।
  • एक पवित्र स्थान बनाएँ: आप एक पवित्र स्थान बना सकते हैं जहाँ आप गायत्री चालीसा का पाठ कर सकते हैं। आप इस स्थान को फूलों, अगरबत्ती और अन्य वस्तुओं से सजा सकते हैं।
  • प्रार्थना से करें शुरुआत: गायत्री चालीसा का पाठ करने से पहले, आप ईश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए प्रार्थना से शुरुआत करें।
  • गायत्री चालीसा का पाठ करें: गायत्री चालीसा का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता से करें। आप अपनी पसंद के आधार पर या तो इसे जोर से या चुपचाप पढ़ सकते हैं।

गायत्री चालीसा के विभिन्न रूप क्या हैं

गायत्री चालीसा का केवल एक संस्करण है, इसके विभिन्न रूप हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

  • श्री गायत्री चालीसा: यह गायत्री चालीसा का सबसे लोकप्रिय रूप है, और माता के भक्तों द्वारा इसका व्यापक रूप से पाठ किया जाता है। चालीसा का यह रूप हिंदी भाषा में लिखा गया है।
  • अंग्रेजी गायत्री चालीसा: गायत्री चालीसा का यह संस्करण अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है और इसमें भी चालीस छंद हैं। यह चालीसा के मूल हिंदी संस्करण का अनुवाद है, और इसका व्यापक रूप से गैर-हिंदी भाषियों द्वारा उपयोग किया जाता है।
  • गुजराती गायत्री चालीसा: गायत्री चालीसा का यह रूप गुजराती भाषा में लिखा गया है, जो भारतीय राज्य गुजरात में बोली जाती है। चालीसा का गुजराती संस्करण भी चालीस छंदों से बना है, और यह गुजरात में माता के भक्तों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • तेलुगु गायत्री चालीसा: गायत्री चालीसा का यह रूप तेलुगु भाषा में लिखा गया है, जो आंध्र प्रदेश राज्य में बोली जाती है। चालीसा का तेलुगु संस्करण भी चालीस छंदों से बना है, और यह आंध्र प्रदेश में माता के भक्तों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

कुल मिलाकर, गायत्री चालीसा व्यापक रूप से माता के भक्तों द्वारा उनका आशीर्वाद और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। चाहे हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, संस्कृत, या तेलुगु में पाठ किया जाए, चालीसा माता गायत्री की महानता और दिव्यता की याद दिलाती है।

FaQs

Q.Who can recite Gayatri Chalisa?

A.जो कोई भी गायत्री माता के आशीर्वाद और कृपा का आह्वान करना चाहता है, वह गायत्री चालीसा का पाठ कर सकता है। लिंग, जाति या धर्म के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं हैं।

Q.गायत्री चालीसा के पाठ का क्या महत्व है?

A.माना जाता है कि गायत्री चालीसा का पाठ करने से आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक कल्याण भी होता है। यह भक्त को दिव्य ज्ञान प्रदान करने के लिए भी कहा जाता है।

Q.क्या गायत्री चालीसा का पाठ कभी भी किया जा सकता है?

A.हां, गायत्री चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन इसका पाठ प्रातःकाल के समय, विशेष रूप से सूर्योदय के समय या संध्या काल (भोर और संध्या काल) के दौरान करना सबसे शुभ माना जाता है।

Q.क्या बिना पुरोहित या गुरु के गायत्री चालीसा का पाठ किया जा सकता है?

A.हां, गायत्री चालीसा का पाठ बिना किसी पुजारी या गुरु के किया जा सकता है। यह एक स्वयंभू स्तोत्र है जिसे गायत्री माता में आस्था और भक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है।

Q.गायत्री चालीसा का पाठ करने में कितना समय लगता है?

A.पूरी गायत्री चालीसा का पाठ करने में लगभग 15-20 मिनट लगते हैं, यह पाठ की गति और शैली पर निर्भर करता है।

Q.गायत्री मंत्र और गायत्री चालीसा में क्या अंतर है?

A.गायत्री मंत्र एक छोटा मंत्र है जिसमें केवल 24 शब्दांश होते हैं जिनका जाप माता गायत्री के आशीर्वाद के लिए किया जाता है। दूसरी ओर, गायत्री चालीसा 40 छंदों वाला एक लंबा भजन है जो माता के विभिन्न पहलुओं की महिमा का वर्णन करता है।

Conclusion

गायत्री चालीसा ज्ञान की अवतार माता गायत्री को समर्पित एक शक्तिशाली प्रार्थना है। इसमें 40 छंद हैं जो माता के गुणों की व्याख्या करते हैं और बाधाओं को दूर करने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

चालीसा शांति, ज्ञान और जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने के लिए आदि माँ की पूजा करने और उनके पवित्र नाम का ध्यान करने के महत्व पर जोर देती है। यह सदाचारी जीवन जीने और मानवता की सेवा करने के लिए धार्मिकता, करुणा और निस्वार्थता के अभ्यास के महत्व पर भी बल देता है।

इसके अलावा, गायत्री चालीसा का भक्तों के मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो भक्ति और विश्वास के साथ इसका पाठ करते हैं। ऐसा माना जाता है कि चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से मन को शुद्ध करने, एकाग्रता में सुधार करने और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है।

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