Bajrang Baan Arth sahit Lyrics in Hindi pdf

दोस्तों अगर आप सम्पूर्ण बजरंग बाण | Bajrang Baan Arth sahit Lyrics in Hindi pdf को दूंड रहे हैं तो आप की यह खोज यहां पूरी हो जायेगी! क्योंकि हम यहां पर समूर्ण बजरंग बाण अर्थ सहित lyrics और PDF भी उपलब्ध करा रहे हैं!

Bajrang Baan Arth sahit Lyrics in Hindi

!! दोहा !!

निश्चित प्रेम प्रतीति ते, विनय करै सनमान !

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान !!

!! चौपाई!!

जय हनुमान सन्त हितकारी !

सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी !!

जन के काज विलम्ब न कीजै !

आतुर दौरि महा सुख दीजै !!

जैसे कूदि सिन्धु महिपारा !

सुरसा बदन पैठि विस्तारा !!

आगे जाइ लंकिनी रोका !

मारेहु लात गई सुरलोका !!

जाय विभीषण को सुख दीन्हा !

सीता निरखि परमपद लीन्हा !!

बाग उजारि सिन्धु महं बोरा !

अति आतुर जम कातर तोरा !!

अक्षय कुमार को मारि संहारा !

लूम लपेटि लंक को जारा !!

लाह समान लंक जरि गई !

जय जय धुनि सुर पुर महं भई !!

अब विलम्ब केहि कारन स्वामी !

कृपा करहु उर अंतर्यामी !!

जय जय लखन प्राण के दाता !

आतुर होइ दुख करहु निपाता !!

जै गिरिधर जै जै सुख सागर !

सुर समूह समरथ भटनागर !!

ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले !

बैरिहि मारू ब्रज की किले !!

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो !

महाराज प्रभु दास उबारो !!

ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो !

ब्रज गदा हनु विलम्ब न लावो !!

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमन्त कपीसा !

ॐ हुं हुं हुं  हनु अरि उर शीशा !!

सत्य होहु हरि शपथ पायके !

रामदूत धरू मारू जाय के !!

जय जय जय हनुमान अगाधा !

दुख पावत जन केहि अपराधा !!

पूजा जप तप नेम अचारा !

नहिं जानत हौं दास तुम्हारा !!

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं !

तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं !!

पाय परौं कर जोरि मनावौं !

येहि अवसर अब केहि गोहरावौं !!

जय अंजनि कुमार बलवन्ता !

शंकर सुवन वीर हनुमंता !!

बदन कराल कल कुल घालक !

राम सहाय सदा प्रति पालक !!

भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर !

अग्नि बैताल काल मारी मर !!

इन्हे मारू, तोहि शपथ राम की !

राखउ नाथ मरजाद नाम की !!

जनक सुता हरि दास कहावो !

ताकी शपथ विलम्ब ना  लावो !!

जय जय जय धुनि होत अकासा !

सुमिरत होत दुसह दुख नाशा !!

चरण शरण कर जोरि मनावौं !

येहि अवसर अब केहि गोहरावौं !!

उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई !

पायं परौं कर जोरि मनाई !!

ॐ चं चं चं चपल चलन्ता !

ॐ हनु हनु हनु हनुमन्ता !!

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल !

ॐ सं सं सहमि पराने खल दल !!

अपने जन को तुरत उबारो !

सुमिरत होय आनन्द हमारो !!

यह बजरंग बाण जेहि मारै !

ताहि कहौ फिर कौन उबारै !!

पाठ करै बजरंग बाण की !

हनुमत रक्षा करै प्राण की !!

यह बजरंग बाण जो जापै !

ताते भूत प्रेत सब कांपै !!

धूप देय अरु जपै हमेशा !

ताके तन नहिं रहै कलेशा !!

!! दोहा !!

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै,

सदा धरै उर ध्यान !

तेहि के कारज सकल शुभ,

सिद्ध करै हनुमान !!

Bajrang Baan Video-

copyright – T-Series

सम्पूर्ण बजरंग बाण अर्थ सहित-

!! दोहा !!

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान !

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान !!

भावार्थ-  जो भी भक्त पूरी निश्चय, प्रेम, विनय और पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ भगवान हनुमान की पूजा अर्चना करते हैं! भगवान हनुमान की कृपा से इसके सभी कार्य शुभ और सिद्ध होता है!

!! चौपाई !!

जय हनुमंत संत हितकारी !

सुन लीजै प्रभु अरज हमारी !!०१!!

भावार्थ-  हे भगवान हनुमान आपकी जय हो, आप संतों के हित की रक्षा करने वाले हैं, हे प्रभु आप मेरी एक अरज सुन लीजिए!

जन के काज विलम्ब न कीजै !

आतुर दौरि महा सुख दीजै !!०२!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप अपने भक्तों के कार्य में जरा भी देरी मत कीजिए, आप जल्दी आइए और अपने भक्तों को भक्ति रूपी परम सुख प्रदान कीजिए!

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा !

सुरसा बद पैठि विस्तारा !!०३!!

भावार्थ-  हे प्रभु जैसे आपने एक ही छलांग में समुंद्र को पार कर लिया! सुरसा जैसी राक्षसी ने अपने विशाल शरीर से भी आपको रोक नही सकी!

आगे जाई लंकिनी रोका !

मारेहु लात गई सुर लोका !!०४!!

भावार्थ-  आगे जाकर लंका की रच्छक लंकनी ने आपको रोका तो आपने एक ही प्रहार से उसको सुरधाम को पहुंचा दिया!

जाय विभीषण को सुख दीन्हा !

सीता निरखि परम पद लीन्हा !!०५!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप ने लंका जाकर विभीषण को भक्ति का असली सुख प्रदान किया! माता सीता को ढूंढ कर आपने भक्तों में सर्वोच्च पद प्राप्त किया!

बाग उजारी सिंधु महं बोरा !

अति आतुर यम कातर तोरा !!०६!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप ने रावण की बाग उजाड़ दी, आपने रावण के सैनिकों का यमदूत की तरह संहार कर दिया!

अक्षय कुमार मारि संहारा !

लूम लपेट लंक को जारा !!०७!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप ने रावण के बेटे अक्षय कुमार का संहार कर दिया! आपने अपनी पूंछ से पूरी लंका को जला कर राख कर दिया!

लाह समान लंक जरि गई !

जय जय धुनि सुर पुर महं भई !!०८!!

भावार्थ-  हे प्रभु सोने की लंका लाख के समान जल गई! जिसकी वजह से स्वर्ग में आपकी जय जयकार होने लगी!

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी !

कृपा करहु उर अन्तर्यामी !!०९!!

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भावार्थ-  हे प्रभु अब किस कारण बिलंब कर रहे हैं! आप अंतर्यामी है जल्दी कृपा करें!

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता !

आतुर होय दुख हरहु निपाता !!१०!!

भावार्थ-  भगवन राम के प्रिय भ्राता लक्षमण के प्राण बचाने वाले आपकी जय हो! हे प्रभु मैं बहुत आतुर हूं मेरे कष्ट का निवारण कीजिए!

जै गिरिधर जै जै सुखसागर !

सुर समूह समरथ भटनागर !!११!!

भावार्थ-  पर्वत को अपने हाथों पर धारण करने वाले हे प्रभु आपकी जय हो! भगवान विष्णु के समान सामर्थ्य रखने वाले हे प्रभु आप की जय हो!

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले!

बैरिहिं मारू बज्र की कीले !!१२!!

भावार्थ-  हे भगवान हठीले हनुमान आप शत्रुओं पर बज्र की कीलों से प्रहार कीजिए!

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो !

महाराज प्रभु दास उबारो !!१३!!

भावार्थ-  हे प्रभु वज्र रूपी गदा से शत्रुओं को मार भगाओ! हे प्रभु मुझ दास को कष्टों से छुटकारा दिलाओ!

ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो !

बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो !!१४!!

भावार्थ-  हे प्रभु ओंकार का हुंकार भरकर अब धावा बोल दीजिए! अपनी वज्र रूपी गदा का प्रहार करने में बिलंब मत कीजिए!

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा !

ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा !!१५!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप वानरो में सर्वश्रेष्ठ है! आप दुश्मनों के सर धड़ से अलग कर दीजिए!

सत्य होहु हरि शपथ पाय के !

रामदूत धरु मारु धाय के !!१६!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप के बारे में स्वयं भगवान विष्णु कहते हैं कि रामदूत हनुमान उनके सत्रुओं को तुरंत विनाश करते हैं!

जय जय जय हनुमंत अगाधा !

दु-ख पावत जन केहि अपराधा !!१७!!

भावार्थ-  हे भगवान हनुमान आपकी हृदय की अनंत गहराइयों से आपकी जय हो! आप के रहते हुए लोग किस अपराध की वजह से कष्ट पाते हैं!

पूजा जप तप नेम अचारा!

नहिं जानत कछु दास तुम्हारा !!१८!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप का यह दास पूजा, जप तप आचार विचार कुछ नहीं जानता!

वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं !

तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं !!१९!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप की वजह से मुझे वन उपवन, जंगल, पर्वत, रास्ते में घर में या बाहर कही भी डर नहीं लगता!

पांय परों कर जोरि मनावौं !

यहि अवसर अब केहि गोहरावौं !!२०!!

जय अंजनि कुमार बलवन्ता !

शंकर सुवन वीर हनुमंता !!२१!!

भावार्थ-  हे प्रभु मैं आप के पैर पड़कर हाथ जोड़कर आपसे विनती करता हूं! इस अवसर पर और किस तरह मैं आपको बुलाऊं! 

माता अंजनी के पुत्र, भगवान शिव के अवतार आपकी जय हो!

बदन कराल काल कुल घालक !

राम सहाय सदा प्रति पालक !!२२!!

भूत प्रेत पिशाच निशाचर !

अग्नि बेताल काल मारी मर !!२३!!

इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की !

राखु नाथ मरजाद नाम की !!२४!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप का बदन काल के समान विकराल है, आप सदा ही भगवान राम के सहायक और उनके बचनों को मानने वाले हैं! भूत प्रेत पिसाच बेताल आदि को आप अपनी अग्नि से भस्म कर देते हैं! हे प्रभु आप भगवान राम की लाज रखिए और इन सब को मार के खतम कीजिए!

जनकसुता हरि दास कहावौ !

ताकी शपथ विलम्ब न लावो !!२५!!

जय जय जय धुनि होत अकाशा !

सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा !!२६!!

चरण शरण कर जोरि मनावौ !

यहि अवसर अब केहि गौहरावौं !!२७!!

उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई !

पांय परौं कर जोरि मनाई !!२८!!

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता !

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता !!२९!!

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल !

ॐ सं सं सहमि पराने खल दल !!३०!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप माता सीता के भी प्रिय सेवक हैं, आपको उनकी सौगंध है कि अब देर मत कीजिए! आपकी जय जयकार की ध्वनि आकाश में गूंज रही है, आपका नाम स्मरण करने से सभी दुखों का नाश हो जाता है! हे प्रभु मैं आप को हाथ जोड़कर आप के पैर पड़कर आपको मानता हूं

आप ही मुझे रास्ता दिखाइए मैं क्या करूं! हे भगवान अब उठिए और चलिए मैं आप के हाथ जोड़ता हूं और आप के पैर पड़ता हूं! हे प्रभु अब चले आओ आपकी हुंकार से दुश्मन दल सहमें हुए हैं!

अपने जन को तुरत उबारो !

सुमिरत होय आनन्द हमारो !!३१!!

यह बजरंग बाण जेहि मारै !

ताहि कहो फिर कौन उबारै !!३२!!

पाठ करै बजरंग बाण की !

हनुमत रक्षा करैं प्राण की !!३३!!

भावार्थ-  हे प्रभु आप अपने भक्तों का तुरंत उद्धार कीजिए, आप की सुमिरन से हमारा जीवन आनंदित हो जाता है!

यह बजरंग बाण जिसे लगेगा, तो उसे कौन बचा पाएगा!

जो कोई इस बजरंग बाण का पाठ करेगा, उसकी प्राणों की रक्षा स्वंय भगवान हनुमान जी करेंगे!

यह बजरंग बाण जो जापै !

तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे !!३४!!

धूप देय अरु जपै हमेशा !

ताके तन नहिं रहै कलेशा !!३५!!

भावार्थ-  जो कोई इस बजरंग बाण का जाप करेगा, उसके पास भूत प्रेत कोई नही आयेगा!

धूप जलाकर जो कोई इस बजरंग बाण का जाप करेगा उसके शरीर में कोई कष्ट नहीं रहेगा!

!! दोहा !!

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान !

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान !!

भावार्थ-  जो कोई प्रेम पूर्वक भगवान हनुमान का भजन करता है, और सदा अपने हृदय में उनका ध्यान करता है, उसके सभी शुभ कार्यों को भगवान हनुमान सिद्ध करते हैं!

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Bajrang Baan Lyrics in Hindi pdf

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Bajrang baan lyrics English

!! Doha !!

Nishchay prem pratith te, binay kare sanman !

Tehi ke karaj sakal shubh, siddha karai Hanuman !!

!! Chaupayee !!

Jai Hanumant sant hitkari !

Suni lijai prabhu araj hamari !!01!!

Jan ke kaaj vilambha na kijai !

Aatur dauri maha sukha deejai !!02!!

Jaise kudi Sindhu wahi para !

Surasa badh paithi vistara !!03!!

Aage jayee lankini roka !

Marehu laat gaee sur loka !!04!!

Jaay Vibhishan ko sukh deenha !

Sita nirakhi param padh leenha !!05!!

Baagh ujaari Sindhu maha bora !

Ati aatur yum kaatar tora !!06!!

Akshay kumar maari sanhara !

Loom lapait Lannk ko jaara !!07!!

Laah samaan Lannk jaari gayee

Jai jai dhuni sur pur mmhah bhayee !!08!!

Ab vilaambha kehi kaaran swami !

Krupa karahu urr antaryaami !!09!!

Jai jai Lakshman praan ke daataah !

Aatur hoy dukh harahu nipaata !!10!!

Jai Giridhar jai jai sukh-sagar !

Sur samuha samartha bhatnagar !!11!!

Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumant Hattile !

Bairihi maru bajjrah ki kile !!12!!

Gada bajjrah lai bairihi maaro !

Maharaj prabhu daas ubaaro !!13!!

Om-kar huunkar maha-prabhu dhaavo !

Bajjra gada hanu vilambha na lavo !!14!!

Om hrim hrim hrim Hanumant Kapeesa !

Om Huum Huum Huum Hanu ari urr shisha !!15!!

Satya hou Hari shapath paay-ke !

Ram-duuth dharu maru dhaay-ke !!16!!

Jai jai jai Hanumant agaadha !

Dukkha paavat jan kehi apraadha !!17!!

Puja jap jap nem achaara !

Nahin jaanata kacchu daas tumhara !!18!!

Van upavan, mag giri gruha maahi !

Tumhare bal hum darpath nahi !!19!!

Paay paroh kar jori manavoh !

Yahi avasar abh kehi gohravoo !!20!!

Jai Anjani Kumar Balvanta !

Shankar suvan veer Hanumanta !!21!!

Badan karal kaal kul ghalak !

Ram sahay sada prati-palak !!22!!

Bhoot preth pishachya nishachar !

Agni Betal kaal mari-mar !!23!!

Innhe maru tohi shapath ram ki !

Rakhu naath marjaad naam ki !!24!!

Janaksuta Hari daas kahavoh !

Taaki shapath vilambha na lavo !!25!!

Jai Jai Jai dhuni hoath akasha !

Sumirath hoath dusaha dukha naasha !!26!!

Charan sharan kar jori manavoh !

Yahi avasar abh kehi gouravoh !!27!!

Uthu uthu chalu tohi Ram duhai !

Paayh parooh kar jori manai !!28!!

Om cha cha cha cha chapal chalanta !

Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta !!29!!

Om han han hank deta kapi chanchal !

Om san san sahami parane khal dal !!30!!

Apne jan ko turantah ubharo !

Sumirat hoy anand hamaro !!31!!

Yaha Bajrang Baan jehi mareh !

Tahi kaho phir kaun ubareh !!32!!

Paath karai Bajrang Baan ki !

Hanumant raksha karai pran ki !!33!!

Yaha Bajrang Baan jo jaape !

Tehi te bhoot preth sabh kaape !!34!!

Dhup deyah aru jaapai hamesha !

Taake taanh nahi rahe kalesha !!35!!

!! Doha !!

Prem pratith-he kapi bhajai, sada dharai urr dhyaan !!

Tehi ke karaj sakala shubh, siddha karai hanuman !!

बजरंग बाण का पाठ कब करना चाहिए 

बजरंग बाण का पाठ कब करें यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। वैसे तो आप बजरंग बाण का पाठ कभी भी कर सकते हैं लेकिन यह एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है, इस पाठ में हम भगवान हनुमान को भगवान राम की सपथ देकर विवश कर देते है की वह अपने भक्त के कष्ट को दूर करें। 

क्योंकि श्री हनुमान भगवान राम के अनन्य भक्त हैं तो वह भगवान राम की दी हुई सौगंध को तोड़ नहीं सकते।

भगवान हनुमान को संकटमोचन कहा जाता है, आप अगर बजरंग बाण का पाठ करके भगवान हनुमान का आह्वान करेंगे तो वह आपकी दुख को अवश्य दूर करेंगे। लेकिन यह एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है तो आप को इसका उपयोग तभी करना चाहिए जब आप बहुत ही बड़ी मुसीबत में फंसे हुए हों।

बजरंग बाण का पाठ कब नहीं करना चाहिए 

बजरंग बाण का पाठ कब नहीं करना चाहिए इस प्रश्न के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना आवश्यक है जो निम्नलिखित हैं।

  • किसी से ईर्ष्या वस शत्रुता निकालने के लिए न करें बजरंग बाण का पाठ।
  • किसी निजी स्वार्थ के लिए भी बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।
  • वैसे तो माहिओं को भगवान हनुमान जी की पूजा नही करना चाहिए लेकिन फिर भी यदि कोई महिला भक्त भगवान हनुमान की आराधना करती हैं तो उन्हें मासिक धर्म चक्र के समय बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।
  • अगर आप नास्तिक हैं आप को भगवान हनुमान में विश्वास नहीं है, आप सच्चे मन से भक्ति नहीं करते हैं तो आप को बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।
  • किसी भी तरह की शारीरिक अशुद्धि की अवस्था में बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।
  • किसी भी तरह की लालच ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए भी बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।
  • किसी भी तरह के गलत कार्य को पूरा करने किसी गलत तरीके की सिद्धि प्राप्त करने के लिए भी बजरंग बाण का पाठ नही करना चाहिए।

What Is Bajrang Baan । Who Wrote Bajrang Baan-

बजरंग बाण को किसने लिखा और क्यूं लिखा इसके बारे में एक कहानी प्रचलित है कि एक बार गोस्वामी तुलसीदास के ऊपर उनके किसी शत्रु ने मारण मंत्र का प्रयोग कर दिया जिसकी वजह से तुलसीदास जी के पूरे शरीर पर फोड़े निकल आए और उनकी जान पर बन आई। 

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जिसके बाद तुलसी दास जी ने भगवान हनुमान जी से प्रार्थना की और अपने प्राणों की रक्षा करने की बिनती की इसी दौरान उन्होंने बजरंग बाण की रचना की और उसका पाठ किया। जिससे भगवान हनुमान ने उनके प्राण की रक्षा की और उनके फोड़े ठीक हो गए। 

इसी वजह बजरंग बाण की बहुत ही शक्तिशाली मंत्रों में गिनती की जाती है। बजरंग बाण को बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है।

bajrang baan benefits | bajrang baan padhne ke fayde-

अगर आप bajrang baan padhne ke fayde के बारे में जानना चाहते हैं तो आप को बता दें कि बजरंग बाण के पाठ से अनेकों लाभ मिलता है जिनमे से कुछ निम्नवत हैं।

भय से मुक्ति- अगर आप पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ बजरंग बाण का पाठ करते हैं तो आप के मन से सभी तरह दर और भय खत्म हो जाता है क्योंकि भगवान हनुमान के नाम से ही सभी तरह की बुरी शक्तियां और बुरे ख्याल कोषों दूर भाग जाते हैं।

निरोगी काया- ऐसा माना जाता है कि बजरंग बाण के पाठ से आप के अंदर उत्पन्न होने वाली दिव्य ऊर्जा से आप के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और आप का शरीर निरोगी रहता है। अगर आप हृदय रोगी है या आप उच्च रक्तचाप के रोगी है तो बजरंग बाण के पाठ से आपको लाभ मिल सकता है।

आध्यात्मिक विकास- ऐसा कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ करने के लिए आप के अंदर भगवान हनुमान जी के प्रति भक्ति और विश्वास का होना आवश्यक है इसलिए जो भी बजरंग बाण का पाठ करता है उसके अंदर भक्ति भावना तथा आध्यात्मिक विकास स्वतः ही हो जाता है।

व्यापार में सफलता- यदि आप का कोई व्यापार है लेकिन आपको व्यापार में सफलता नहीं मिल रही है आपके व्यापार में घाटा हो रहा है तो आप लगातार आठ मंगलवार बजरंग बाण का पाठ करा सकते हैं। आप के व्यापार में अवश्य ही सफलता मिलेगी।

नए कार्य में सफलता- यदि आप को नए कार्यों में अथवा नौकरी इंटरव्यू वगैरह में असफलता मिलती है तो आप लगातार इक्कीस मंगलवार बजरंग बाण का पाठ करा सकते हैं आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

बजरंग बाण पाठ करने की विधि-

अगर आप बजरंग बाण के पाठ का पूरा फल प्राप्त करना चाहते हैं तो आप को बजरंग बाण का पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पाठ करना चाहिए। बजरंग बाण पाठ की विधि हम आपको नीचे बता रहे हैं।

शुभ दिन- मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार ये दिन बजरंगबली के दिन कहे जाते हैं आप इनमे से कोई दिन चुन सकते हैं।

शुभ समय- बजरंग बाण के पाठ के लिए सूर्योदय से पूर्व ब्रम्हमुहूर्त सबसे उपयुक्त समय है। आप इस समय स्नान ध्यान से निवृत्त होकर इसका पाठ करें।

सही स्थान- बजरंग बाण का पाठ करने के लिए ऐसा स्थान निर्धारित करें जो पूरी तरह से शांत हो और किसी प्रकार की विघ्न उत्पन्न न हो। इसके लिए आप हनुमान जी के मंदिर में जा सकते हैं या फिर घर में ही भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित कर पूजा घर बना कर वहीं पर पाठ कर सकते हैं।

आसन- बजरंग बाण का पाठ करने की लिए कुश का आसन बनाएं और उसे ही इस्तेमाल करें क्योंकि कुश का आसन सबसे सुध्ध माना जाता है।

दीपदान- भगवान हनुमान की पूजा में दीपदान का बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए आप पंच अच्छत (गेहूं, चावल, काला तिल, उड़द और मूंग) को भिगो कर पीस लें और उसका दिया बनाकर उसमें कच्चे सूत की बत्ती बनाएं और इसे जलाएं और ध्यान रखें की पूरे पाठ के दौरान दीप प्रज्जवलित रहे।

रुद्राक्ष की माला- बजरंग बाण का पाठ करने के लिए आप रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप जितने बार का संकल्प लेते हैं उतने दाने की माला ले सकते है इससे आप को पाठ करने में मदद मिलेगी।

मंगलाचरण- बजरंग बाण का पाठ सबसे पहले भगवान गणेश की स्तुति से करें उसके बाद भगवान श्री राम की आराधना करें उसके बाद माता सीता की आराधना करें।

बजरंग बाण का पाठ- अब पूरे श्रद्धा और भक्ति और पवित्र मन से बजरंग बाण का पाठ करें और ध्यान रखें कि बजरंग बाण के शब्दों का उच्चारण एकदम सही सही करें।

बजरंग बाण का पाठ पूरा होने के बाद भगवान का कीर्तन करें और हनुमान चालीसा का पाठ भी करें। 

इस प्रकार आप बजरंग बाण का पाठ करें इससे संकटमोचन हनुमान आप पर जरूर प्रसन्न होंगे और आप की हर मनोकामना को अवश्य पूरी करेंगे।

साथ ही साथ आप हनुमान चालीसा का पाठ करें – यहां क्लिक करें

Conclusion

कुल मिलाकर बजरंग बाण का पाठ एक बहुत ही शक्तिशाली स्रोत है जिसके पाठ से आप भगवान हनुमान को प्रसन्न कर अपने जीवन की मुश्किलों से निजात पा सकते हैं।

उम्मीद करता हूं दोस्तों की मेरे द्वारा सम्पूर्ण बजरंग बाण अर्थ सहित | bajrang Baan Arth sahit lyrics in hindi pdf का  यह प्रयास आपको पसंद आया होगा! अगर पसंद आया हो तो आप इस पोस्ट को शेयर कर सकते हैं!

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